वीर बालक झुनकू सिंह – Hindi Kahaniya

वीर बालक झुनकू सिंह Hindi Kahaniya:- 

गांधीजी ने कहा-‘आज हमारे देश को ऐसे नौजवानों की आवश्यकता है जो तिरंगे की शान बनाए रखें। उसे गिरने न दें। यह तिरंगा हमें सत्य, अहिंसा और न्याय का पाठ पढ़ाता है।
 
 
वीर बालक झुनकू सिंह - Hindi Kahaniya
 
 
गांधीजी का संदेश गांव-गांव तक पहुंच रहा था। आजादी की लड़ाई लड़ने यच्चे, बूढ़े, जवान, औरत-मर्द, सभी गांधीजी के साथ एकजुट हो रहे थे। झुनकू सिंह छोटा था तो क्या, उसमें भी साहस पैदा हो गया था। अपने गांव के लोगों को उसने गांधीजी की बातें बताई। इस सेना में यार-कालिकाएं, औरतें, बूढ़े-जवान सभी थे। सभी देश पर मर-मिटने को तैयार थे। गांव में एक दिन एक समाचार पहुंचा। गांधीजी के सेवक करहा रियासत में एक सभा करेंगे। झुनकू सिंह भी इस सभा के लिए तैयार हो गया हर गांव से एक-एक टुकड़ी इस सभा में पहुंचेगी।
झुनकू सिंह ने अपने गांव की टुकड़ी के लिए एक तिरंगा तैयार किया। झुनकू को रात को नींद नहीं आई। कल दिन निकलेगा और कब वह तिरंगे को लेकर सबसे आगे होगा।सुबह हुई नन्हें गांव के नन्हे देश भक्त एक स्थान पर तय समय पर पहुंच गए। सबने खादी के वस्त्र पहने हुए थे। झुनकू के हाथ में तिरंगा था। वह सबसे आगे था। सबसे आगे रहने की होड़ लगी थी। किसी को भी पुलिस की गोली कर डर नहीं था। पंक्तियों में जुलूस नारे लगाता हुआ चल पड़ा। उनका नारा था ‘तिरंगा हमारी शान है, तिरंगा हमारी जान है, जो हम से टकराएगा, चूर-चूर हो जाएगा।’ जुलूस को पुलिस ने एक चौराहे पर रोकना चाहा। जुलूस नहीं रुका। लाठियों से डराना चाहा। कोई भी नहीं रुका। झुनकू के सिर पर पहली लाठी पड़ी। फिर तो लाठियां-ही-लाठियां उन पर पड़ने लगी ।
लाठियों के प्रहार से बहुतों के सिर से खून बहने लगा। झुनकू ने खून की परवाह न की। वह तिरंगे को मजबूती से पकड़े आगे बढ़ता रहा उसका कुर्ता खून में रंग गया था। पुलिस का दारोगा परेशान था। जब तक इस तिरंगे को नहीं गिराया जाता तब तक लोग रुकेंगे नहीं। दारोगा ने अपनी पिस्तौल निकाली। उसने झुनकू को निशाना बनाया।
गोली झुनकू के सीने में लगी। वह और जोर से चिल्लाने लगा भारत माता की जय, भारत माता की जय।’ झनकू के पीछे एक युढ़िया चल रही थी। जब उस बुढ़िया ने देखा कि झनक गिर रहा है, उसने झपटकर तिरंगा सम्भाल लिया। दूसरी गोली बुढ़िया को लगी तिरंगा गिरने वाला था कि उसके पीछे एक चौदह साल की बालिका थी, उसने तिरंगा सम्भाल लिया। तीसरी गोली ने उसका सीना चीर दिया ।
नन्हीं जान जमीन पर गिरी तो सही, पर लोगों ने दूर से देखा कि तिरंगा अब भी ऊपर था। वह उसी तरह लहरा रहा था। उस बालिका ने तिरंगे को गोली से बने अपने सीने के छेद में गाड़ दिया। उसके मुंह से मरते समय निकला था। तिरंगा हमारी शान है, तिरंगा हमारी जान है।
 
 

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