परी महल (paree mahal) – Kahani

 

परी महल:-

किसी नगर में एक राजा राज किया करता था एक दिन वह राजा अपने दरबार में बैठा हुआ था। तभी उसके मंत्री ने उससे कहा-राजन! एक आदमी कह रहा था कि कल रात उसने आकाश में उड़ती हुई एक परी देखी है। यह सुनकर राजा ने उस आदमी को बुलाया यह बेचारा डरते-डरते राजा के पास पहुंचा। राजा ने उससे पूछा- क्या तुमने सचमुच परी देखी है?’
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हा महाराज !वह व्यक्ति बोला- वह बहुत सुंदर पोशाक पहने हुए थी उसके हाथ में एक जादू की छड़ी थी। उसके पंख बहुत ही खूबसूरत थे। वह आकाश में उड़ती हुई विल। डेटा-‘jt राजा आप के लिए ज़ोर से बात की थी। परियों या तो बहुत दूर हैं। लोगों को गुमराह योग्य नहीं हैं। राजा ने अपने सैनिकों को आदेश दिया कहकर उस व्यक्ति को कारागार में डलवा दिया। दरवार खत्म होने पर राजा अपने महल में आया। यह यहत उदास था। रानी ने उसकी उदासी का कारण पूछा तो उसनेSaid’aj अदालत में एक आदमी है कि वह एन्जिल देखा है। एक अच्छा पारी बहुत ज्यादा है। मैं अपराध अफवाह फैला दी कि मनुष्यों को पकड़ने के से बंधे हैं, लेकिन मामला मेरे मन है कि वह वास्तव में नहीं था में एक संदेह बना हुआ है। “सुनवाई bidding’maharaj रानी!

 

 

यदि नहीं परी कहानियों उन्हें पता चलता है बात क्यों?आपने उस आदमी को दंड देकर अच्छा नहीं किया। राजा चुप हो गया। कुछ देर बाद उसने भोजन किया और सोने के लिए अपने कक्ष में चला गया। थोड़ी कुछ ही समय बाद राजा देखा दिव्य मुस्कान सामने खड़े हैं। रंगीन प्रकाश से भरा सभी। राजा आश्चर्यचकित था। एंजेल-‘tum उसे यह कहते हुए उद्धृत थे कि परियां नहीं होती। देखो, मैं परी। तुम अभी भी विश्वास न हो तो मैं तुम मछली बना देती हूँ। यह कहकर उसने अपनी जादुई छड़ी जमाई, राजा मछली बन गया। परी ने उसे एक तालाब में छोड़ दिया। इस बीच एक दूसरी परी वहां आ गई। उसने सब- कछ देख लिया था उसने पहली परी से कहा-तुमने राजा को मछली बनाकर अच्छा नहीं किया।पहली परी को लेकर दूसरी परी समुद्र के किनारे गई समुद्र में तरह-तरह की मछलियां थीं। दूसरी परी ने कहा-“देखो, कितनी सुंदर मछलियां हैं, किंतु ये चुप क्यों। हैं ?” इनकी बोली को भला कौन सुन समझ सकता है ?’ ‘तुमने राजा को मछली बनाकर उसे दंड दे दिया । वह भी अब बोल नहीं सकता जय वह बोल नहीं पाएगा तो तुम कैसे है? हमें उसे फिर से राजा बनाकर पूछना चाहिए कि अब वह परियों के बारे में क्या सोचता है ? समझोगी कि राजा अव परियों के बारे में क्या सोचता दोनों परियां उस तालाब के किनारे गई, जहां राजा मछली बना पानी में तैर रहा था। पहली परी ने जादू की छड़ी घुमाई तो मछली बना गजा फिर से अपनेके रूप में आता है। दूसरा एक जादू की छड़ी दूत राजा खेल रहे हैं और आकाश में आकाश फांसी के दूसरे दौर में राजा दूर evaporating है। दोनों अपनी पारी मुस्कुराते हुए कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं। राजा इतना डर ​​गया था। फिर दूसरी परी छड़ी घुमाया गया है। आकाश में एक महल का निर्माण किया। राजा की पहली परीमहल में गई। उसने राजा को एक सिंहासन पर बैठाया। अब राजा बहुत खुश था। पहली परी ने फिर छड़ी घुमाई तो महल के चारों ओर सुंदर-सुंदर फूल खिल गए । बाग-बगीचे लग गए। दूसरी परी ने छड़ी घुमाई तो चारों ओर शीतल मंद सुगंध वाली हवा चलने लगी। पेड़ों पर चिड़िया चहचहाने लगी। उसके बाद पहली परी ने पुनः छड़ी घुमाई तो राजा के सामने एक मेज और उसके ऊपर फल और खाने का सामान आ गया। उसके बाद राजा ने पेट भरकर खाना खाया।

 

राजा यह सब देखकर सोच रहा था कि परियां कितनी सुंदर, कितनी अच्छी होती हैं। आज तक मैं बेकार ही परियों की निंदा करता रहा।फिर उसने दोनों परियों से कहा-मैंने अपनी गलती स्वीकार कर ली है। अब मैं परियों के बारे में कोई शंका नहीं करूंगा।यह सुनकर दूसरी परी ने अपनी छड़ी घुमाई। राजा नीचे उतरने लगा अपने महल में जहां वह सो रहा था, वहीं फिर से आ गया। राजा के दिन-भर गायब रहने के कारण पूरे दरबार में और राज्य में चिंता की लहर दौड़ गई थी। उसके लौटने पर चारों ओर खुशियां मनाई जाने लगीं। इसी बीच दोनों परियों ने सोचा कि क्यों न वह आकाश महलराजा को उपहार में दे दिया जाए । यही सोचकर दूसरी परी ने अपनी छड़ी घुमाई तो आकाश में भटकतावह महल राजा के महल के पास ही आकर खड़ा हो गया। मंत्री ने यह सूचना राजा को सुनाई- महाराज ! आपके महल के बगल में संगमरमर का एक भव्य महल रातों-रात बन गया है।

 

 

राजा वहां गया तो देखा कि वह भव्य महल आकाश वाला ही महल है। वह महल के अंदर गया तो देखा कि वही दोनों परियां महल में खड़ी मुस्करा रही हैं। उन्होंने राजा से कहा-महाराज! यह महल हम परियों की ओर से भेंटस्वरूप स्वीकार करें।इतना कहकर परियां अंतर्धान हो गई। राजा ने उस महल के चारों ओर पक्की दीवार बनवा दी। उसने उसका नाम रखा परी महल। अगले दिन राजा ने उस आदमी को कैदखाने से मुक्त कर अपने पास बुलवाया, जिसने परी को देखने की बात कही थी। वह आदमी आया तो राजा ने उससे क्षमा मांगी और उसे अपने दरबार में एक सम्मानित पद देकर राजकीय सेवा में नियुक्त कर दिया।

 

 

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